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Unified Payment Interface (UPI)से Cashless Transaction कैसे  करें

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हैल्लो  दोस्तों , Cashless ट्रान्जेक्शन के लिए क्या  आपको  UPI (Unified Payment Interface ) के  बारे  में  पता  है ? शायद  इसके  बारे  में  बहुत  कम  लोगो  को  पता  है। लेकिन  जिनको  UPI के  बारे  में  पता  है , वो  इसका  पूरा  फायदा  उठा  रहे  है। अगर  आप  भी  UPI  App Transaction का  फायदा  उठाना  चाहते  है , तो  आप  सही  जगह  है,  क्योकि  आज  मैं   आपको  बताऊंगा की  आप  कैसे  Unified Payment Interface (UPI) का  प्रयोग  करके  Online Payment, Cashless Transaction, Send Money, Receive Money जैसे  Service का  प्रयोग  कर  सकते  है

Unified Payment Interface (UPI)से Cashless Transaction कैसे  करें

ऐसे करें Cashless ट्रांजेक्शन

Financial Ministry Of India ने  देखा   की  500 और  1000 नोट  बंद  हो  जाने  के  कारण . सभी  लोग  बहुत  प्रश्न  है . तो   उन्होंने  एक  योजना  बनाया  की  अगर  बैंक  से  Cashless   Transaction करने  वालो  की  भीड़  कम  हो  जाये . तो  लोगो  को  थोड़ा  आराम   मिलेगा . इसलिए  Financial   Ministry of India  के  आर्डर  से  सभी  Bank ने  अपना  एक  UPI App बनाया  है . जिससे  आप  Play Store, itune से  Download कर  सकते  है . Financial Ministry के  अनुसार  आप  UPI   Service का  प्रयोग  करके सभी  बैंको  के  साथ  Cashless Transaction कर  सकते  है  तो  चलिए  देखते  है । UPI एक्चुअली  है  क्या  और  UPI का  प्रयोग  कैसे  करेंगे

Unified Payment Interface (UPI) ?

Friends Unified Payment Interface (UPI) एक  Multi banking Payment System है . UPI का  प्रयोग  Basically Cashless Transaction के  लिए  होता  है . जैसे  की  Fund transfer, Online Transaction, Send Money between Bank Accounts, Receive Money. Online electrics Bills,Online Shopping Payment, Water Bills, House rent Payment, etc,
पहले  आप  UPI Service का  प्रयोग  केवल   Net Banking के  द्वारा  ही  कर  पाते  थे . लेकिन  500 और  1000 बंद  होने  के  कारण . सभी  बैंक  ने  अपना -अपना  UPI App लांच  किया  है . इस  सभी  UPI App का  उसे  आप  Online Transaction के  लिए  कर  सकते  है . अगर  आपके  Account में  Net Banking की  सुबिधा  नहीं  है  तब  भी  आप  UPI के  जरिये  Online पैसे  सेंड और रिसीव  कर  सकते  हैं
For Example- अगर  आपके  पास  Union Bank of India का  Account है  तो  आप  Google Play Store से  Union Bank UPI App Download कर  सकते  हैं . और  उसका  प्रयोग  Online Transaction के  लिए  कर  सकते  हैं।
Download UPI App For

तो  चलिए  मैं  आपको  UPI App प्रयोग  करने  के   बारे  में  कुछ  Important Step बता  देता  हु , जो  आपके  लिए  बहुत  Helpful होंगे  UPI App प्रयोग  करने  के  लिए ।

दोस्तों  अगर  आप  Cashless Secure Transaction करना   चाहते  है . तो  आपके  लिए  UPI App सबसे  best Option है . क्योकि  इसमें   आपको  रियल  Account प्रयोग  नहीं  करना  पड़ता . UPI App में  आप  अपने  Real Account से  एक   Virtual ID Create करते  है,और  आप  उसी  ID का  प्रयोग  करके  Transaction करते  है , जिसके  वजह  से  आपका  Account 100% Secure रहता  है ।

वैसे  भी  अगर  आपको  UPI App Use करने  में  Problem हो  रहा  है,तो  आप  अपने  Bank के  Helpline Number पर  काल करके  इसके  बारे  में  जानकारी  हासिल  कर  सकते  है ।

Axis Bank   – 1800 419 5959 or 1800 419 6969Andhra Bank – 1800 425 1515
Allahabad Bank – 1800 226 061
Bank of Baroda (BOB)  – 1800 102 4455
Bharatiya Mahila Bank (BMB) Registered Office Landline number is – 011- 47472100 (Not toll free)
Dhanlaxmi Bank  – 1800 425 1747
IDBI  – 1800 200 1947
Kotak Mahindra Bank – 1800 102 6022
Syndicate Bank -1800 425 5784
Punjab National Bank (PNB) -1800 122 222
ICICI Bank  – 1800 102 4242
ICICI bank NRI  – 1800 102 5600
Pocket ICICI  – 1800 102 6708
HDFC Bank   – 1800 227 227
Bank of india (BOI)  – 1800 22 0229
Canara Bank  – 1800 425 0018
Central Bank of india  – 1800 200 1911
Karnataka Bank  – 1800 425 1444
Indian Bank  – 1800 4250 0000
STATE BANK OF INDIA  – 1800 425 3800
Union Bank of India (UBI)  – 1800 22 22 44 or 1800 208 2244
Uco Bank  – 1800 103 0123
Vijaya Bank  – 1800 425 5885 or 1800 425 9992 or 1800 425 4066उम्मीद है ये पोस्ट आपको पसंद आया होगा और अपके लिए हेल्पफुल रहा होगा। अगर आपके पास इस पोस्ट के बारे में कोई भी सुझाव या विचार है| तो आप हमें कमेंट जरुर करे।
Seoupdatescenter ब्लॉग पर आने के लिए आपका धन्यवाद।

जानिए कितना आसान है पेटीएम से पैसे ट्रांसफर करना

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नोट बंदी और टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रभाव की वजह से Paytm आज सबकी जरूरत बनता जा रहा है. इसलिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि प्रधानमन्त्री जी के अनुसार कैशलेस होने में Paytm की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है. पैसे ट्रांसफर, रिचार्ज या बिल पेमेंट सब आप पेयटीएम से कर सकते हैं.

इससे आप बहुत आसानी से एक पेटीएम खाते से दुसरे पेटीएम खाते में पेटीएम कैश, डेबिट या क्रेडिट कार्ड से ट्रांसफर कर सकते हैं. कैसे? यही हम आपको बताने जा रहे हैं. पहले भाग में हम आपको स्टेप-बाई-स्टेप पैसे ट्रांसफर करना बता रहे हैं, बाकि अगले भाग में.

पेटीएम कैश ट्रांसफर के लिए सबसे पहले आपके पास जिसे पेटीएम कैश भेजना है उसका रजिस्टर्ड पेटीएम नम्बर चाहिए.

स्टेप 1: 

पहले चरण में आपको अपने पेटीएम खाते से लॉग इन करना है. यदि आपके पास पेटीएम खाता नहीं है तो कृपया साईन अप करें.

स्टेप 2:

इसके बाद आपको निचे दिख रहे फोटो के अनुसार Add Money to Wallet पर क्लिक करना है. फिर आपको जितन पैसा भेजना है उसे अंकों में लिखना है. यदि आपके पेटीएम खाते में पहले से पैसे हैं तो आप इस स्टेप को स्किप कर सकते हैं. नहीं है तो ऐड कर लें.
स्टेप 3:
मनी ऐड करने के बाद Paytm Wallet पर क्लिक करें. जैसे ही आप इस पर क्लिक करेंगे आपको थोड़ा निचे की तरफ Send Money का ऑप्शन दिखेगा उस पर क्लिक करें.
इसके बाद आपको Try it now का ऑप्शन दिखेगा. इस पर क्लिक करके अपने फोन में पेटीएम ऐप इनस्टॉल करें और फिर लॉग इन करें.

स्टेप 4:

लॉग इन होते ही पे का ऑप्शन दिखेगा. उसपर क्लिक कीजिए.

स्टेप 5:

इसके बाद आपको Scan Code का ऑप्शन दिखेगा लेकिन आप इसके बाद मोबाइल नम्बर पर क्लिक करना है

Step 6:

 Mobile no. पर क्लिक करते ही सामने Send Money to Mobile Number का ऑप्शन खुलेगा जिसमें आपको जिस रजिस्टर्ड पेटीएम अकाउंट में पैसे भेजने हैं वो नम्बर डाल देना है.
इसके बाद आप राशि डालें फिर चाहें तो वजह भी बता सकते हैं कि पैसे क्यों भेज रहे हैं.  फिर सेंड बटन पर क्लिक कर दीजिए.

स्टेप 7:

सेंड बटन पर क्लिक करते ही पैसा चला जाएगा और स्क्रीन पर पैसा जाने का मैसेज भी आ जाएगा.

इन 5 तरीकों से इंटरनेट से कमाइए पैसा

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यदि आप भी इंटरनेट पर ज्यादा समय बिताते हैं तो ये खबर आपके लिए ही है. इसके लिए आपको बस थोड़ा टेक्नोफ्रेंडली होना चाहिए. फिर तो आप घर बैठे-बैठे अच्छा पैसा कमा सकते हैं.  सकते हैं। जानिए ये 5 तरीके, जो आपको कर सकते हैं मालामाल…
 
1. फेसबुक, ट्विटर या गूगल से बग ढूंढना
 
अगर आपको कोडिंग का नॉलेज है तो आप फेसबुक, ट्विटर और गूगल की कोडिंग में कमी ढूंढकर लाखों रुपए एक ही बार में बग बाउंटी के तौर पर कमा सकते हैं. अभी हाल में ही फेसबुक के बग बाउंटी कार्यक्रम के जरिए भारतीय रिसर्चरों को 4.84 करोड़ रुपए दिए गए हैं. दुनिया के सबसे बड़े सोशल नेटवर्किंग प्लैटफॉर्म द्वारा यह अभी तक किया गया सबसे बड़ा पेमेंट है.
 
 
2. यूट्यूब स्टार बनें
 
यूट्यूब कई लोगों के लिए कमाई का जरिया बन गया है. इसकी पहुंच के चलते ऐसा हो रहा है. यहां तक कि विडियो रिकॉर्ड करने के लिए आपको प्रफेशनल इक्विपमेंट्स या प्रॉपर सेट-अप की भी जरूरत नहीं पड़ती है. एक मिड-रेंज स्मार्टफोन आपका काम आसान बना देता है. आपको यूट्यूब चैनल क्रिएट करना होता है, आपके चैनल के मशहूर होने और सब्सक्राइबर्स की संख्या बढ़ने के साथ आपकी कमाई की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं. एक कैटिगरी या सब्जेक्ट चुनें, जिसके बारे में आप विडियो क्रिएट और शेयर करना चाहते हैं. एक बार आप फेमस हो जाएं तो ब्रांड्स आपको अपने प्रॉडक्ट्स के लिए पेमेंट करने लगते हैं.
 
 
3. सोशल मीडिया का इस्तेमाल
 
ये भले ही आपको मजाक लगे लेकिन आप फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसी सोशल मीडिया साइट्स से पैसे कमा सकते हैं. आप किसी एक सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म को चुनकर शुरुआत कर सकते हैं. इसके बाद अन्य नेटवर्क्स से जुड़ सकते हैं. सोशल नेटवर्क्स पर कुछ पॉप्युलैरिटी और पहुंच हासिल करने के बाद आप स्पॉन्सर्ड पोस्ट्स के जरिए कमाई शुरू कर सकते हैं. याद रखिए कि इसमें काफी वक्त लगता है और आपको फैन्स की जरूरत होती है जो आपकी पोस्ट्स शेयर करें.
 
 
4. फ्रीलांसिंग करें
 
फ्रीलांस काम हासिल करना आसान है. कई ऐसी वेबसाइट्स हैं, जो छोटे फ्रीलांस उपलब्ध कराती हैं. इनसे प्रति असाइनमेंट 5 डॉलर से 100 डॉलर तक की कमाई होती है. इन वेबसाइट्स पर टास्क अलग-अलग कैटिगरी के हिसाब से लिस्ट होते हैं. आप अपनी स्किल्स के हिसाब से टास्क के लिए अप्लाई कर सकते हैं. ध्यान रखिए कि आपको केवल तब कमाई होती है, जब आप टास्क पूरा करते हैं और वह अप्रूव हो जाता है. आपको क्लाइंट की जरूरत के मुताबिक कई बार काम को रिवाइज करने की जरूरत पड़ सकती है.
 
 
5. ब्लॉग शुरू करें
 
ब्लॉगिंग से कमाई के लिए आपको मेहनत करनी पड़ती है और इसमें समय भी लगता है. यह भी समझना जरूरी है कि आपका ब्लॉग तत्काल कमाई नहीं देता. इसमें एक साल से ज्यादा का वक्त लगता है और उसके बाद कमाई शुरू होती है. एक बार आपके ब्लॉग पर पर्याप्त संख्या में विजिटर्स आने लगते हैं तो आपको ऐडवर्टाइज़मेंट, स्पॉन्सर्ड कॉन्टेंट और एफिलिएट मार्केटिंग से कमाई होने लगती है. ब्लॉग शुरू करने के दो तरीके हैं या तो आप वर्डप्रेस या टंबलर जैसी वेबसाइट्स को फ्री ब्लॉग के लिए यूज करें या अपना सेल्फ-होस्टेड ब्लॉग शुरू करें.

स्मार्टफोन को ओवरहीटिंग से बचाने के लिए 6 टिप्स

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दिन पर दिन स्मार्टफोन की स्क्रीन और क्षमता बढ़ती ही जा रही है. और इसीके साथ स्मार्ट फोन्स में ओवरहिटिंग की समस्या भी बढ़ रही है. प्रोसेसिंग पावर के हिसाब से उनमें बैटरीज़ भी बड़ी लगाई जा रही हैं. चार्ज होने में ज्यादा वक्त न लगे, इसलिए फास्ट चार्जिंग टेक्नॉलजी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. मगर कई बार स्मार्टफोन गर्म हो जाते हैं. चार्जिंग करते वक्त, गेम खेलते वक्त या फिर हेवी ऐप्स इस्तेमाल करते वक्त इस तरह की समस्या आती है.
ज्यादातर मामलों में फोन के गर्म होने के पीछे आमतौर पर हार्डवेयर की दिक्कत होती है, लेकिन सर भी कुछ बातों का ख्याल रखकर उसे गर्म होने से बचा सकते हैं. जानें, कैसे…
1. केस या कवर हटाएं
स्मार्टफोन को कवर केस में रखने से हीट अंदर ही रहती है और यह गर्म होने लगता है. कवर हटाने से हीटिंग की समस्या से काफी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है.
2. चार्ज करते वक्त ठोस सतह पर रखें
फोन को चार्ज करते वक्त इसे बेड वगैरह के बजाय किसी ठोस सतह पर रखना चाहिए. नरम चीजें हीट को सोख लेती हैं. चार्जिंग के दौरान निकलने वाली हीट स्मार्टफोन को और गरम कर देती है.
3. रात भर फोन को चार्ज न करें
बहुत से लोग स्मार्टफोन को रात भर चार्जिंग पर लगाकर छोड़ देते हैं. इससे न सिर्फ बैटरी की लाइफ पर असर पड़ता है, यह हीटअप भी होती है. कई मामलों में तो ओवरचार्ज की गई बैटरियां फट भी चुकी हैं.
4. हेवी ऐप्स को बंद करें
बहुत से ऐप्स ऐसे होते हैं जो हेवी ग्राफिक्स इस्तेमाल करते हैं. इसमें प्रोसेसिंग पावर भी ज्यादा लगती है और डिवाइस गर्म भी होने लगते हैं. इस तरह से ऐप्स को इस्तेमाल न करने पर किल कर देना चाहिए यानी पूरी तरह क्लोज कर देना चाहिए.
5. धूप में न रखें
स्मार्टफोन्स को, खासकर प्लास्टिक के बैक पैनल वाले फोनों को सीधी धूप में कभी नहीं रखना चाहिए. प्रोसेसिंग की वजह से पैदा होने वाली हीट और धूप की गर्मी स्मार्टफोन को और गर्म कर देती हैं. इससे फोन को नुकसान भी पहुंच सकता है.
6. थर्ड पार्टी चार्जर और बैटरीज यूज न करें
कई बार थर्ड पार्टी चार्जर या बैटरीज़ से भी फोन गर्म हो जाते है. अलग वाट के चार्जर से फोन चार्ज करने भी फोन गर्म हो जाते हैं. फोन को नुकसान पहुंचता है सो अलग.

हैकिंग से बचने के लिए सोशल मिडिया पर लॉगइन इस्तेमाल करने में सावधान रहें

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आये दिन होने वाले साइबर हमले सुर्ख़ियों में छाये रहते हैं. कभी किसी नेता का तो कभी फिल्म स्टार्स के अकाउंट हैक होते रहते हैं. इसलिए सावधान रहना बहुत महत्वपूर्ण है. जब आप किसी वेबसाइट पर जाते हैं तो वहां फेसबुक या गूगल अकाउंट से लॉगइन करने का विकल्प होता है. इन्हें सोशल लॉगइन कहा जाता है.
यदि आप एंड्राइड स्मार्टफोन पर ऐसे सोशल लॉगइन का इस्तेमाल करते हैं. और आप अपने गूगल अकाउंट का इस्तेमाल करके लॉगइन करते हैं. तो ये जानना ज़रूरी है कि गूगल के पास आपके बारे में क्या जानकारी है. तो इस बात का ध्यान रखिए. वर्ना आपके बारे में बहुत ज़्यादा डेटा कंपनी के पास तुरंत पहुंच जाएगा.
ऑनलाइन कंपनियां इन्हें बहुत पसंद करती हैं. क्योंकि उन्हें सब्सक्राइबर के बारे में पूरी जानकारी उन्हें तुरंत मिल जाती है. इनका कहना है कि सोशल लॉगइन रखने वाले सब्सक्राइबर को एक और पासवर्ड याद रखने की ज़रुरत नहीं होती है. और एक ही पासवर्ड को कई वेबसाइट पर इस्तेमाल करना भी सिक्योरिटी के लिहाज़ से ख़तरनाक है.
फेसबुक पर भी सभी कनेक्टेड ऐप के बारे में आपको जानकारी मिल जाती है और उसकी इजाज़त अगर आपने दी हुई है तो उसे बाद में बदला जा सकता है. ‘लॉग इन विथ फेसबुक’ का अगर आप कई वेबसाइट पर इस्तेमाल करते हैं तो ऐप को दी हुई इजाज़त को एक बार फिर से जांच लें. ऐसा करने से आप ऑनलाइन सुरक्षा के दायरे में रहते हैं.
 
आपको समझना होगा कि अगर फेसबुक, गूगल या ट्विटर के लॉग इन का इस्तेमाल करके आप दूसरे वेबसाइट पर जाते हैं तो उन कंपनियों को आपके इंटरनेट की आदतों के बारे में सभी जानकारी हो जाती है.
कुछ लोगों का मानना है कि एक ऐसा फेसबुक या गूगल अकाउंट बना लीजिये जिसे सिर्फ सोशल लॉगइन के लिए इस्तेमाल किया जाए. ये कोशिश अगर आप स्मार्टफोन के ज़रिए करेंगे तो कहीं ऐसा न हो कि स्मार्टफोन में रखा डेटा ये वेबसाइट चुरा लें. इसलिए अगर कोई और लॉग इन इस्तेमाल करना है तो वो अपने डेस्कटॉप या लैपटॉप से ही कीजिये.

अब गूगल का प्ले स्टोर नया और पहले से बेहतर हो जायेगा

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दुनिया भर के 80 फ़ीसदी स्मार्टफ़ोन एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलते हैं इसलिए इस ऐप स्टोर से डाउनलोड भी बहुत ज़्यादा होते हैं. एंड्राइड और प्ले स्टोर चलाने वाली कंपनी गूगल है और वो दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम चलाती है.
अब गूगल का प्ले स्टोर नया और पहले से बेहतर हो जायेगा
 
गूगल प्ले स्टोर दुनिया का सबसे बड़ा ऐप स्टोर है. इसमें 20 लाख से भी ज़्यादा ऐप हैं. गूगल प्ले स्टोर पर ढेर सारे बदलाव जल्दी ही हो सकते हैं. अब लोग वॉइस सर्च पर पहले से ज़्यादा भरोसा कर रहे हैं. एंड्राइड पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार प्ले स्टोर के एंटरटेनमेंट सेक्शन का नाम भी बदला जा सकता है.
आम तौर पर गूगल एक एक करके ऐसे बदलाव करता है. लेकिन एंड्राइड पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार गूगल प्ले स्टोर में ऐसे कई बदलाव की फ़िलहाल टेस्टिंग चल रही है. पर अब पहली बार इतने सारे बदलाव एक साथ किये जा रहे हैं. कई लोगों को ये बदलाव अब अपने स्मार्टफोन के प्ले स्टोर में दिखाई दे रहा है.
बदलाव में गूगल प्ले स्टोर का बैनर अब नए रूप में दिखाई देगा, सर्च बार को फ़िलहाल प्ले स्टोर से हटा कर स्क्रीन पर अलग जगह दी गयी है और जो अलग-अलग सेक्शन दिखाई देते हैं उनके अंदाज़ में भी बदलाव किया गया है. मूवीज़, बुक्स और म्यूज़िक को एक साथ समेट कर एंटरटेनमेंट सेक्शन को तैयार किया गया है. प्ले स्टोर पर अब बोल कर कुछ भी सर्च करना संभव है.
जीएसएम एरीना के अनुसार ये सभी बदलाव फ़िलहाल गूगल लोगों की प्रतिक्रिया जानने के लिए भी किया गया होगा. इसलिए ये अभी पक्का नहीं है कि जो बदलाव दिखाई दे रहे हैं वो सभी बाद में प्ले स्टोर में होने वाले बदलाव में शामिल किये जाएंगे.

Bounce Rate kya hota hai

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Bounce Rate   क्या है ?
हैल्लो दोस्तों, आज मैं Bounce Rate   क्या होता है उसके बारे में बताने जा रहा हूँ। ब्लॉग बनाने का मकसद चाहे जो कुछ  पर हर एक सीरियस bloggers यही चाहता है की उसके ब्लॉग पर बहुत सारे विजिटर्स आएं, उसके लिखे हर ब्लॉग को ध्यान से पढ़ें,और ज्यादा से ज्यादा देर तक रुके रहें।

यदि आप नई ब्लॉगर हैं और आप भी चाहतें हैं की विजिटर्स आपके ब्लॉग/वेबसाइट पर ज्यादा से ज्यादा देर तक रुके तो समझ लीजिए की आपके ब्लॉग/वेबसाइट के बाउंस रेट को चेक करने का टाइम गया। लेकिन बाउंस रेट को reduce करने से पहले Bounce Rate को समझने की जरुरत है । तो चलिए पहले ये जान लेते हैं की Bounce Rate क्या होता है?

Bounce Rate क्या होता है?
आपके ब्लॉग पर रोज ही नए नए विजिटर्स आतें होंगे कुछ गूगल से, सोशल मिडिया से,तो कुछ रेफेरल लिंक्स से,उनमे से कुछ ही विजिटर्स होतें है जो आपके साइट पर ज्यादा टाइम तक रुकतें हैं।

Bounce Rate उन विजिटर्स का परसेंटेज होतें हैं जो आपके ब्लॉग/वेबसाइट पर आतें तो हैं पर वो उसी समय वैगर किसी पेज को देखे लौट जातें है,मतलब की विजिटर्स आये और तुरंत लौट गएँ इसके बहुत सारे रीजन हो सकते हैं। तो बस ये अब समझ लीजिए की आपके ब्लॉग/वेबसाइट का  Bounce Rate कम ही  हो, जितना कम हो सके उतना सही है।

Bounce रेट हाई होने के कारण
Website की designing अच्छी ना होना
   Website की लोडिंग टाइम ज्यादा होना 
   Website रेस्पॉन्सिव ना होना 
   Content की कमी का होना  
   Interested  Content  का ना होना 

Bounce Rate कैसे पता करें ?
Google  Analytics  गूगल का एक ऐसा  प्रोडक्ट है जिसका हम यूज़ करके हम अपनी ब्लॉग या वेबसाइट की बाउंस रेट मालूम कर सकते हैं।

Bounce Rate कितना होना चाहिए ?
यदि आपके ब्लॉग या वेबसाइट की बाउंस रेट 35 % से ज्यादा है तो आपको सीरियस होने की जरुरत है क्यों की आपके ट्रैफिक किसी ना किसी वजह से लौट जा रहें हैं जो की बिल्कुल सही बात नहीं है।

Bounce Rate को कम करने के तरीके।
बढ़िया वेब डिजाइनिंग 
अच्छी क्वालिटी के कंटेंट 
मल्टीमीडिया का इस्तेमाल 
लोडिंग टाइम कम करें 
इंटरलिंकिंग करें 
पावरफूल विद्गेट्स
कीवर्ड्स सही चुने 
यूजर फ्रेंडली 
मोबाइल फ्रेंडली डिजाइन 
ज्यादा वर्ड्स के आर्टिकल 
पोस्ट का टाइटल सही हो 
पहला पैराग्राफ 

बढ़िया वेब डिजाइनिंग

आपके रीडर्स वेब डिजाइनर नहीं हैं पर उन्हें फिर भी उन्हें अच्छे और बुरे वेब डिजाइन का पूरा सेंस होता है इसलिए अपने ब्लॉग या वेबसाइट लुक अट्रैक्टिव बनायें जो देखने में अच्छा लगे

अच्छी क्वालिटी के कंटेंट 

ऐसा कंटेंट डालें जो विजिटर्स को पसंद आये जिसमे अच्छी इनफार्मेशन हो वो आपके विजिटर्स को बाँध कर रखे।जो विजिटर्स को चाहिए वो लिए ।

मल्टीमीडिया का इस्तेमाल 
अपने ब्लॉग या वेबसाइट को इंटरेस्टिंग बनाने के लिए इमेजेज ,GIF , ऑडियो, वीडियो का इस्तेमाल करें ।

लोडिंग टाइम कम करें
इमेज और मल्टीमीडिया का  इस्तेमाल करें पर एक लिमिट में ज्यादा मल्टीमीडिया का इस्तेमाल आपके साइट के लोडिंग टाइम बढ़ सकता है ।

इंटरलिंकिंग करें 
अपने आर्टिकल में पहले वाले पोस्ट का भी लिंक डाले ताकि विजिटर्स आपके साइट पर जायद देर तक रुके रहें ।

कीवर्ड्स सही चुने 
कीवर्ड्स का सही होना बहुत जरुरी है यदि आपने अपने आर्टीकल में सही कीवर्ड्स का इस्तेमाल किया है तो सही विजिटर्स आपके साइट तक पहुंचेंगें और इंटरेस्ट भी रखेंगे ।

यूजर फ्रेंडली 
यूजर फ्रेंडली का मतलब ये है की जो आपके पोस्ट का फॉर्मेट है वैसा ही होना चाहिए जिसको पढ़ने में आसानी हो। साइट की मेनू हो क्लियर हो जैसे को कोई साइट के विजटर को साइट में कही जाना हो तो आसानी से जा सके ।

मोबाइल फ्रेंडली डिजाइन
मोबाइल फ्रेंडली डिजाइन  का मतलब वेबसाइट रेस्पॉन्सिव होना चाहिए यानि की उसकी usability हर डिवाइस और ब्राउज़र पर के लिए होनी चाहिए जब से स्मार्टफोन आया है ज्यादातर यूजर साइट को मोबाइल पर ही ब्राउज कर लेतें हैं बजाये कंप्यूटर या लैपटॉप के तो इस लिए आपका साइट मोबाइल फ्रेंडली डिजाइन होना चाहिए ।

WhatsApp
ज्यादा वर्ड्स के आर्टिकल 
लम्बा पोस्ट लिखे पर ध्यान रहे की पैराग्राफ छोटा हो , ज्यादा बड़ा पोस्ट पढ़ना किसी को पसंद नहीं होता है । आपका आर्टिकल ज्यादा से ज्यादा 500  से 600 होना चाहिए ।

पोस्ट का टाइटल सही हो 
पोस्ट का टाइटल अच्छा लिखें और ऐसा लिखें जिसको पढ़ कर समझा जा सके की इस पोस्ट में क्या है। बहुत से लोग क्या करते हौं की पोस्ट का टाइटल  कुछ और है और आर्टिकल कुछ और रीडर्स उसी समय लौट जातें है । जो की SEO की नजर से बहुत ही गलत है ।

पहला पैराग्राफ 
जब भी आर्टिकल लिखे उसमे जितना जल्दी हो सके क्लियर करने की कोसिस करे की आप उस आर्टिकल में क्या बताने जा रहें हैं। और वह आपके साइट पर बन रहेगा ।

keywords नाम तो सूना सूना लगता है, पर होता क्या है?

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keywords नाम तो सूना सूना लगता है, लेकिन ये होता क्या है?
keywords नाम तो सूना सूना लगता है, लेकिन ये होता क्या है?

keywords क्या होता है?

यदि आप blogging करते हैं तो कहीं ना कहीं keywords के बारे में जरूर पढ़ते होंगे । यदि आप blogging में नए हैं तो आपको keywords  के बारे में नहीं पता होगा । यदि आपको keywords  के बारे में नहीं पता की   keywords  क्या होता है और हम इसको अपने ब्लॉग या वेबसाइट में कैसे उपयोग करें, तो ये आर्टिकल आपके लिए बहुत ही हेल्पफुल होगा , क्योकिं हम इस आर्टिकल में जानेगें की  keywords क्या होता है और एक बढ़िया  keywords कैसे चुनें ।
कीवर्ड्स, search  engine को ये बताता है की
आपका ब्लॉग या वेबसाइट किस टॉपिक पर है। उदहारण के तौर पर “website  designing ” आपके  वेबसाइट का keywords “website  designing ”  होगा।  search  engine इसका calculating करके देखता है की वह particular वर्ड्स जिसको हम keywords कहतें हैं किसी भी आर्टिकल में कितनी बार use किया गया है।
Example के तौर पर अगर मैं अपने वेबसाइट के आर्टिकल  में “website  designing ” 2 -4 बार लिखतें है तो  search  engine को ये अनुभव हो जायेगा की आपका वेबसाइट “website  designing ” पर है । जब कोई visitor “website  designing ” से सम्बंधित search  engine में सर्च करेगा तो आपका वेबसाइट search  engine में टॉप पर शो होगा।
क्योंकि आपने एक keywords को चुन कर उसको टारगेट किया है, लेकिन एक बात का ध्यान रहे आपका keywords 2 -3 % ही होना चाहिए। जैसे की 100 वर्ड्स का आर्टिकल है तो उसमे 2 – 3 keywords होना चाहिए नहीं तो search  engine आपको आर्टिकल को  स्पैम  मान लेगा। मुझे उम्मीद है की ऊपर के उदहारण से आप समझ गएँ होंगे की keywords क्या होता है. यदि आप चाहते हैं की आपके ब्लॉग पर ज्यादा ट्रैफिक आए तो, आपको ऐसे keywords पर ब्लॉग लिखनी होगी जो बहुत बार search किया गया हो।

कैसे चुनें एक अच्छा keywords?

जब भी आप कोई पोस्ट लिखने जाएँ तो उसका बढियां keywords सेलेक्ट कर लें,जैसे की मैं एक पोस्ट लिखने जा रहा हूँ “How to Earn Money by WhatsApp ”  इस में मेरा कीवर्ड्स “Earn Money by WhatsApp” रहेगा। अब्ब मैं इस कीवर्ड्स को अपने पोस्ट में काम से काम 4 से 5 बार यूज़ करूँगा। और इसके बाद इस कीवर्ड्स को “permalink , meta descriptions , heading “और भी important जगह पर यूज़ करके पब्लिश करूँगा।
कीवर्ड्स को सेलेक्ट करने के बाद उस कीवर्ड्स को कहाँ-कहाँ यूज़ करें :-
पोस्ट के टाइटल में
पोस्ट के लिंक में
हेडिंग ह1,H2 ,H3 में
पहले पैराग्राफ में
इमेज के नाम में
ऐसा करने से मेरे पोस्ट को बहुत सारे ट्रैफिक मिलेंगे क्यों की मैंने एक मैंन कीवर्ड्स को टारगेट किया है। आप जब कोई पोस्ट लिखने जाएँ तो उस पोस्ट को मैंन कीवर्ड्स को टारगेट करें जो इंटरनेट पर बहुत बार सर्च किया जाता हो। यदि आपको पता लगाना है की कौन सा कीवर्ड्स बहुत बार सर्च किया जा रहा है तो गूगल का फ्री टूल आता है गूगलर कीवर्ड प्लानर उसके जरिये आप पता लगा सकते है। आपको ये पोस्ट कैसा लगा। इस पोस्ट से रिलेटेड कोई सवाल हो तो आप कमेंट में पूछ लें।

Fake pokemon go apps infiltrate google play store

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‘पोकेमॉंन गो ‘ गेम की लोक प्रियता को देखते हुए गूगल प्ले स्टोर पर कुछ लोगो ने फर्जी एवं खतरनाक एप्प्स डाल दिए हैं ।   Software  Security company (ESET ) ये एप्प्स फोन के लिए खतरनाक हैं । कंपनी ने बताया की किसी ने गूगल प्ले स्टोर पर जाकर ‘पोकेमॉंन गो अल्टिमेट ‘ नाम का संदिग्ध एप्प डाल दिया था इस एप्प को बहुत से लोगों ने डाउनलोड कर चुके हैं । ESET के मुताबिक यह पहला ऐसा मैलवेयर वाला एप्प है, जो की फोन के स्क्रीन को लॉक कर देता है । फार्च्यून पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक इस एप्प को डाउनलोड करने के बाद जब रन  करके इनस्टॉल  किया जाता है तो ‘पोकेमॉंन गो ‘ के बजाये  ‘PI  Network ‘ नाम का एप्प इनस्टॉल हो जाता है । जो भी इस एप्प को रन करता है उसका फोन फ्रीज हो जाता है ।
  फोन को ठीक करने के लिए बैटरी निकल कर रिबूट करना पडता  है । रिबूट करने के बाद आपको ऐप्स में  ‘PI  Network ‘ कहीं नहीं मिलेगा । लगेगा की वह एप्प गायब हो गया है, लेकिन वह बैकग्राउंड में रन करते हुए ‘फेक ऐड क्लिक ‘ जनरेट  करता रहता है ।
  यदि आपने भी कोई ऐसा एप्प इन्सटाल्ड कर दिया है तो जल्द से जल्द हटा दें । इसे हटाने के लिये फोन के ऍप्लिकेशन्स मैनेजर में जाना होगा । हला की ये अभी गूगल प्ले स्टोर और एप्पल के प्ले स्टोर पर अमेरिका, जापान,ऑस्ट्रेलिया,फ्लिपिंस, न्यू जीलैंड,ब्रिटेन और जर्मनी में उपलब्ध है।
  ‘पोकेमॉंन गो ‘ दरसल Argument  Reality App है जो कमरे और जीपीएस के जरिये काम करता है । इसमें पोकेमॉंन नाम के क्रीचर को पकडना होता है , जो डिवाइस के कमरे पर नजर आता है । यह गेम पूरी दुनिया में बहुत पॉपुलर हो चूका है । यह अभी कुछ हीं देशों में रीलीज़ किया गया है इसलिए लोग फेक और संदिग्ध एप्प इन्सटाल्ड कर रहें हैं ।

“Pokemonn Go ‘Public dearness given game on Google Play Store Apps have entered some people false and dangerous. Software Security company (ESET) These Apps are hazardous. The company said that anyone going to the Google Play Store ‘Go Pokemonn Ultimate’ name was put questionable apps, many people have downloaded the app. ESET is the first app with malware which locks the phone screen. According to a report on Fortune After downloading the app is installed and then run “Pokemonn Go ‘instead of’ PI Network ‘is the name of the app installed. The app also runs his phone is frozen.
  Phone have to reboot to fix the battery out. After rebooting your apps ‘PI Network’ will not get anywhere. He will take app has disappeared, but it runs in the background, the ‘click add fake’ generates.
  Even if you have an app Installed to remove as soon as possible. The phone will go to Applications Manager to remove it. These women now on the Google Play Store and Apple Online Store, America, Japan, Australia, Flipins, New Zealand, the UK and is available in Germany.
  “Pokemonn Go ‘Argument Reality App fact, through the room and the GPS works. It would catch the Creature Pokemonn name, which appears on the device’s features. The game has grown in popularity around the world is. Such activity has been released in some countries it is still so fake and suspicious people are doing Installed apps.

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